क्या इंसानियत मर चुकी है?- हिमांशु अरोड़ा

  • Human being is a very beautiful creature. जिसने अपने दिमाग और मेहनत से आकाश में उड़ना सीख लिया है और समुंद्र की गहराईयों में उतर चुका है l जहाँ जानवर के पास नुकीले सिंघो के बावजूद भी वो अपना बचाव करने में असफल हो जाते है वहां इंसान ने सिंघों के बिना ही सिर्फ अपनी बुद्धि के इस्तेमाल से खुद का बचाव करना सीख लिया है l पापी हो या कोई सज्जन पुरुष, नास्तिक हो या आस्तिक, educated हो या अनपढ़, मुर्ख हो या चालाक, दिहाड़ीदार हो या मंत्री, peon हो या officer, गोरा हो या काला, सब इंसान है l एक छोटी सी example से समझते है कि ये सारी दुनिया एक box यानि एक डिब्बे के समान है और हम यानि इंसान उस डिब्बे में पड़ी गेंदों के समान – वो गेंदे बड़ी भी है, छोटी भी, सफेद भी है और काली भी l उस डिब्बे को अगर कोई हिलाता है या उसके साथ कुछ भी करता है तो उसके अंदर पड़ी सभी गेंदे affect होंगी फिर चाहे वो गेंद कोई भी हो, कैसी भी हो l आज इंसान – इंसान से ही दूर भाग रहा है , हम शायद भूल चुके है कि religion और caste से पहले हम इंसान है- human being है l सभी की feelings और problems काफी हद तक एक ही है l आज भगवान को मानने वाला , भगवान को ना मानने वाले को इंसान नहीं समझता है ,मंत्री अफसर को इंसान नहीं समझता, अफसर चपरासी को इंसान नहीं समझता , अमीर गरीब को इंसान नहीं समझता l क्या हम भूल चुके है कि दुसरे व्यक्ति के पास भी वैसा ही दिल है जैसा हमारे पास है l उसका भी परिवार है, उसे भी भूख प्यास वैसी ही लगती है जैसी हमें लगती है, उसे भी आराम की जरूरत है l उसे भी अपने बच्चे अच्छे लगते है , उसे भी अपने लिए और अपने परिवार के लिए कुछ करना है l
  • लेकिन हम दूसरों की खुशिओं को कुचलकर comfort हासिल करना चाहते है l एक धुप में जाकर मजदूरी करता है और दूसरा दफ्तर में बैठकर pen चलाता है लेकिन target और goal तो एक ही है – “समाज के लिए काम करना” किसी को नीच कहना या गलत behave करना मानवता का अपमान है l क्या छोटे अपराधियों को झेल भेजना ठीक है ? उन्हें किसी सुधारशाला में भी भेजा जा सकता है जहाँ उसको जिंदगी का सही मतलब समझाया जाये और उसकी जिंदगी बदली जा सके l इससे समाझ में सुधार आ सकता है l कोई इंसान दुसरे इंसान कि मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ जानवरों जैसा behave करे और उसे इंसान ही ना समझे l यह ठीक नहीं है l रिक्शा चलाकर एक इंसान दुसरे इंसान को घोड़ा बनकर खींचता है और मंजिल तक पहुंचाता है और वही इंसान थोड़े से पैसो के लिए उसके साथ झगड़ा करे और उसे गाली दे  – इंसानियत मर चुकी है l एक सफाई कर्मचारी रोज़ घर से आपका कचरा उठा कर लेकर जाता है ऐसे में उसे नीच कहना और insult  करना यह मानवता कि हत्या ही तो है l क्यों दुसरे को उसके काम से देखा जा रहा है हम यह क्यूँ नहीं देख पाते कि वो भी इंसान है , उसके भी बच्चे है, उसका भी परिवार है l एक समय में जितनी भूख एक गरीब को लगती है उतनी ही अमीर को लगती है l खाना खाने की capacity में ज्यादा अंतर तो नहीं है न l basic needs तो सब की एक जैसी है l एक मंद बुद्धि जिसके पास दुनिया कि हर सुख सुविधा है क्यूंकि उसके पास पैसा और अप्रोच है और वो एक मेहनती और इमानदार इंसान के उपर बैठ कर उसका शोषण करता रहे और हम यह कहते रहे कि सिस्टम ही ऐसा है l एक ओर ऊँची- ऊँची बिल्डिंग में , महलों जैसे घरों में तरह तरह के पकवान पकते हो और दूसरी ओर फुटपाथ पर सोने वालों को पेट भरने के लिए रोटी भी न मिले l यह चिंता का विषय है l जब पैसे की कमी के कारण किसी माँ कि गोद सुनी हो जाती है वहां इंसानियत का गला घोंट दिया जाता है l जहाँ पेट की आग मिटाने के लिए एक lady केवल मान ही नहीं विवश होकर अपना देह भी बेच देती है, वहां इंसानियत सिसक सिसक कर रोती है l अमीर का पुत्र होने पर पैसे को फूंकने का अधिकार और गरीब का पुत्र होने पर भूखे रहने की मजबूरी – दोनों ही स्थितियां भयंकर है l इंसानियत हमें समानता सिखाती है – equality होनी बहुत जरूरी है l system ऐसा होना चाहिए कि सब को उपर उठने के लिए एक जैसी opportunities मिले l अमीर को गरीब की मदद करनी चाहिए न कि उसका शोषण l शरीर भी अपने अंदर से जरूरत से अधिक खाया गया भोजन निकाल देता है तो हम इतना पैसा लेकर कहाँ जाने की सोच रहे है l हर एक को दुसरे के लिए कुछ न कुछ जरुर करना चाहिए ताकि जो नर्क की ज़िन्दगी जी रहा है उसे भी जिन्दगी का आनन्द मिल सके l system कैसा होना चाहिए – एक example से समझते है l एक वृक्ष के हर एक पत्ते और शाखा को सूरज की रोशनी और हवा चाहिए और इसी वजह से वृक्ष की फैलावट ऐसी होती है हर एक पत्ते को रोशनी और हवा मिलती है l वृक्ष अपने अभी अंगों का एक जैसा ख्याल रखता है और यही कारण है कि वृक्ष के सभी अंग वृक्ष को एक बड़ा और विशाल बनाने में पूरा योगदान देते है l इसीलिए हमें भी कुछ ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो सब को समान अवसर प्रदान करे ताकि सभी देश की विकास यात्रा में शामिल हो सके l चंद लोगो को विकास यात्रा में शामिल करना क्यूंकि उनके पास पैसा है देश को आगे नहीं पीछे लेकर जा रहा है l व्यक्ति का विकास समाज के लिए और समाज का विकास व्यक्ति के लिए होना चाहिए l अगर हम यह प्रयास करें कि हमारे आस पास कोई भी व्यक्ति दुखी न हो, भूखा न सोये, उसके पास अपने परिवार को पालने के लिए पर्याप्त धन हो तो शायद समाज का चेहरा बदल सकता है और हम सब खुद को विकसति कर सकते है l आज जरूरत है हर एक इन्सान को उसकी capability के अनुसार शिक्षा मिले, काम मिले, आगे बड़ने  के लिए समान अवसर मिले l तब धरती पर ही स्वर्ग बन जायेगा l -हिमांशु अरोड़ा

सहयोग करें, शिकायत नहीं । Himanshu Arora |

श्री कृष्ण ने जब गोवर्धन पर्वत अपनी ऊंगली पर उठाया था, वो वाक्य हम सब को अच्छी तरह मालूम है l
इंद्र देव के गुस्से ने जब बदले की भावना का रूप धारण किया तो निरंतर बारिश शुरू कर दी, जिससे ब्रज वासी काफी परेशानी में आ गये l हर जगह तबाही का माहोल था, लोग डूब रहे थे, जानवर मर रहे थे l इस संकट को देखते हुए श्री कृष्ण ने ब्रज वासिओं की मदद करने के लिए वहां स्थित गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठा कर ब्रजवासिओं को आश्रय दिया l हालांकि ब्रजवासी जानते थे कि हम उस पर्वत को उठा नहीं सकते फिर भी सिर्फ सहयोग हेतु हर ब्रजवासी एक एक लाठी उस पर्वत पर लगाता है ताकि श्री कृष्ण को यह ना लगे कि वो अकेले है l
आज की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है,
सरकारें, प्रशासन, डाक्टर, सफाई कर्मचारी, बैंकर, जरूरी समान की सप्लाई करने वाले हम सभी को बचाए रखने के लिए इस संकट की घड़ी में हर सफल प्रयास कर रहें है और अगर हम सहयोग नहीं देंगे, घरों में नहीं रहेंगे, social distancing का खयाल नहीं रखेंगे, बार बार हाथ नहीं धोयेंगे, मास्क नहीं पहनेंगे तो इनका मनोबल टूट सकता है l इसलिए सहयोग करें, शिकायत बिलकुल न करें l घर बैठ कर बातें बनाना और सोशल मिडिया पर प्रसिधि के लिए सिस्टम को बुरा कहना बहुत आसान है l सिस्टम आपकी भलाई चाहता है और वो तभी संभव है जब आप शिकायत नहीं सहयोग करेंगे l
घर पर रहें – सुरक्षित रहें l

– Himanshu Arora

Feeling of Love जैसा कुछ नहीं है- (By Himanshu Arora)

अक्सर शादी के बाद पति या पत्नी से सुना जाता है कि अब उनके प्यार में कमी आ गयी है, पहले वो ऐसी नहीं थी या पहले वो मेरी बहुत इज्ज़त करता था l मेरी पत्नी से मेरा अब रिश्ता वैसा नहीं रहा जैसा शादी से पहले था या फिर जैसा शादी के बाद एक दो साल था l बहुत सारे बदलाव आ चुके है, ये शिकायत कई बार पत्निओं को भी अपने पतिओं से रहती है l
तो इसके लिए मैं कहता हूँ कि आप उनसे प्यार करें l
तो लोग कहते है कि अगर वो feeling ही नहीं है तो प्यार कैसे करें


दोस्तों प्यार करना किसी काम को करने जैसा है, फिर चाहे उस काम को करने का आपका मन हो या ना हो,
जैसे प्रशंसा करना, एक दुसरे की बात मानना, एक दुसरे के काम को सराहना, एक दुसरे कि बात को ध्यान से सुनना ,
तो क्या मैं आप से पूछ सकता हूँ कि क्या आप ये सब करने के इच्छुक है?
ये तो फिल्मों में प्यार के सबंध में कुछ ऐसे दृश्य दिखाए जा रहे है कि हमें लगता है , प्यार करने के लिए किसी एहसास या किसी feeling का होना जरूरी है , जब कि यह सिर्फ और सिर्फ किसी काम को करने जैसा ही है, इसके इलावा कुछ नहीं l
दुसरे शब्दों में कहें तो प्यार sacrifice है l क्या आप अपने बच्चों के लिए कुछ चीजों का sacrifice करते है, और वो त्याग वो sacrifice इसीलिए किया जाता है क्यूंकि आप उनसे प्यार करते हैl
इस लिए अगर आप चाहते है कि आपका और आपकी पत्नी या आपके पति के बीच सब कुछ पहले जैसा हो तो sacrifice करना सीखें, एक दुसरे कि बातों को सुने, समझे , एक दुसरे की प्रशंसा करें और कुछ आदतों को जो सामने वाले को पसंद नहीं है, उसको छोड़े, उनका त्याग करें l फिर देखना , जो होगा वो चमत्कार से कम नहीं होगा l

– Himanshu Arora (My Ideas and Thinking)

TO CLEAR CHILD’S VISION, FIRST LIGHTEN YOUR LIFE.

Himanshu’s Blog- My Ideas and Thinking

Finally, We reach at the time where life is easy with technology and gadgets. Gadgets are much closer than our family member, like I love to take my cellphone always with me instead of my family member. Even It is not possible for us to go to bathroom without mobile phone. Some people say “It is used to make pressure”. So funny! Instead of this, one and a half year old baby knows how to pickup a call, make a call, how to skip ad on youtube, how to use google assistant and so many things, that are even not known to me till now. From where they are getting so many knowledge regarding these gadgets. Well, the answer is simple i.e from us. We can notice a child is watching mobile from a long time. But what about ourselves. We are continuously watching mobiles day or night. And we can’t put this aside that the children have more grasping power than anything else. They are watching us.
Try reading books in front of your children. I request to all the pregnant ladies that please don’t spend your time watching mobiles. Spend your time reading good books, novels etc. This will surely help your child to become genious and extraordinary.
I strongly recommend Sanskrit Books to develope children ability. Because in future it is only sanskrit language which is going to be at great extent and people with knowledge of sanskrit will be in high demand.
Instead of this you can also read different languages books so that child’s brain can be more strong and able to feel free in every circumstances. Try reading books of motivation, inspiration & of success stories.  But please avoid mobile phones. People can also say that we may have more knowledge in our gadgets. But guys you know little knowledge is more harmful than having no knowledge. In your gadgets knowledge which is available, is very limited. We usually listen in Hindi-
एक छोटा सा दीया भी पूरे अंधकार को खतम कर देता है ।
But sorry to say, this can’t be lighten the whole area.
अंधकार का दूर होना बात और है और रोशनी करना बात और है ।
हमें रोशनी चाहिए ताकि सब अच्छे से दिख सके ।
We have to lighten our life so that our children’s vision must be clear. Life is mixture of up and downs and the whole life is very small to experience all the up and downs. We must take ideas and guidance from the experience of others by reading books.  So many books are available in market just to tell you about the life. Go and read them and guide your children.
Thanks
Himanshu Arora
My Ideas And Thinking
http://www.myideasandthinking.com
+91-94637-67811

Lets Unlock Inner Potential – Life Skills Seminar by Himanshu Arora

ਇਸ ਸੈਸ਼ਨ ਦੋਰਾਨ ਸਾਡੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਹੋਏਗੀ ਕਿ
“ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਕਦੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ?

ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਤੋਂ ਕੀ ਸਮਝਦੇ ਹੋ?
ਕਿ 5 ਵਜੇ ਉਠਣਾ, 6 ਵਜੇ ਉਠਣਾ, ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੜਕੇ 4 ਵਜੇ ਉਠਣਾ?
ਇਹ ਸਭ ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਹੈ?
ਨਹੀਂ l
ਤੁਸੀਂ ਕਹਿੰਦੇ ਹੋ ਕਿ ਮੈਂ ਸਵੇਰੇ 5 ਵਜੇ ਉਠਦਾ….. 6 ਵਜੇ ਉਠਦਾ…. ਜਾਂ ਤੜਕੇ 4 ਵਜੇ ਉਠ ਜਾਂਦਾ ਹਾਂ ,
ਪਰ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਨਹੀਂ ਹੈ?

“ਸਵੇਰੇ ਜਲਦੀ ਉਠਣਾ ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਨਹੀਂ ਹੈ l”
ਇਸ ਗੱਲ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਪੱਲੇ ਬਣ ਲਓ l

ਮੈਂ ਸਵੇਰੇ 3 ਵਜੇ ਉਠ ਜਾਂਦਾ ਹਾਂ, ਪਰ ਕਿ ਇਹ ਮੇਰੇ ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਹੈ?
ਨਹੀਂ … ਮੈਂ 3 ਵਜੇ ਉਠ ਕੇ ਕੀ ਕਰਾਂਗਾ ਜਾਂ ਮੈਂ ਸਵੇਰੇ 5 ਵਜੇ 6 ਵਜੇ ਉਠ ਕੇ ਕੀ ਕਰਾਂਗਾ ,

ਦੋਸਤੋ,
“ਤੁਹਾਡੇ ਦਿਨ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਬੀਤੀ ਰਾਤ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ l”
ਇਹ ਕਿਵੇਂ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ?
ਆਪਣੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਦਾ ਸਾਰਾ ਚਿਠਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਸੋਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਬਹੁੱਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ l

ਫਰਜ ਕਰੋ ਤੁਸੀਂ ਸਵੇਰੇ ਤੜਕੇ ਮਨਾਲੀ ਜਾਣ ਲਈ ਨਿਕਲਣਾ ਹੈ, ਪੈਕਿੰਗ ਸਵੇਰੇ ਕਰੋਂਗੇ ਜਾਂ ਰਾਤ ਨੂੰ ?
ਰਾਤ ਨੂੰ ਹੀ ਕਰਾਂਗੇ l ਗੱਡੀ ਗੁੱਡੀ ਸਭ ਰਾਤ ਨੂੰ ਹੀ ਚਮਕਾ ਲੈਣੇ ਹੈ l ਸਭ ਪੈਕਿੰਗ ਰਾਤ ਨੂੰ ਕਰਕੇ ਸੋਣਾ l

ਏਦਾਂ ਕਿਓਂ?
ਤਾਂ ਕਿ ਲੇਟ ਨਾ ਹੋਈਏ ਤੇ ਟਾਈਮ ਨਾਲ ਮਨਾਲੀ ਪਹੁੰਚ ਜਾਈਏ l

ਫਿਰ ਅਸੀਂ ਰੋਜ਼ ਏਦਾ ਕਿਓਂ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ?

ਮੇਰੇ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ 2010 ਤੋਂ 2019 ਤੱਕ , ਇਹਨਾਂ ਕੁੱਲ 9 ਸਾਲਾਂ ਦੋਰਾਨ ਕੋਈ ਦਿਨ ਅਜਿਹਾ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਮੈਂ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਪਲੈਨ ਨਾ ਕੀਤਾ ਹੋਵੇ l
ਉਹ ਗੱਲ ਵਖਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੰਨ ਲਓ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣਾ ਦਿਨ ਪਲੈਨ ਕੀਤਾ ਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਕਿਸੇ ਦੀ ਮੋਤ ਦੀ ਖਬਰ ਆ ਗਈ ਜਾਂ ਕੋਈ ਹੋਰ ਐਸਾ ਜਰੂਰੀ ਕੰਮ ਆ ਗਿਆ ਜਿਸ ਨੂੰ ਕਰਨਾ ਬਾਕੀ ਕੰਮਾ ਨਾਲੋਂ ਵਧ ਜਰੂਰੀ ਸੀ l

ਪਰ ਆਪਣੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ 24 ਘੰਟਿਆਂ ਨੂੰ ਪਲੈਨ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਤਾਂ ਜਿੰਦਗੀ ਪਲੈਨ ਕਰਨ ਦਾ ਕੋਈ ਮਤਲਬ ਹੀ ਨਹੀਂ ਰਹਿ ਜਾਂਦਾ l
ਸੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਆਪਣੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ ਅਗਲੇ 24 ਘੰਟੇ ਪਲੈਨ ਕਰਨੇ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹਨ l

ਕਿਸੇ ਵੀ ਆਦਤ ਨੂੰ ਅਪਣਾਉਣ ਲਈ 21 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ l

24 ਘੰਟਿਆ ਨੂੰ ਪਲੈਨ ਕਰਨ ਦਾ ਤਰੀਕਾ

ਹੁਣ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦਸਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ 24 ਘੰਟਿਆ ਨੂੰ ਪਲੈਨ ਕਰਨ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ;

To do list ਤਿਆਰ ਕਰਨੀ
ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੀਤੀ ਰਾਤ ਇੱਕ to do list ਤਿਆਰ ਕਰਨੀ ਹੈ ਕਿ ਸਵੇਰ ਉਠ ਕੇ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਕੰਮ ਕਰਨੇ ਹਨ ,
ਉਸ to do list ਨੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਹੈ ਕਿ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਕੰਮ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਫਿਰ ਕੰਮ ਦੀ ਮਹਤਤਾ ਅਨੁਸਾਰ ਥਲੇ ਥਲੇ ਕੰਮ ਲਿਖੀ ਜਾਣੇ l
ਹੁਣ ਬਚਦੀ ਗੱਲ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਸਵੇਰੇ ਉਠਣਾ ਕਿੰਨੇ ਵਜੇ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡੀ ਸਾਰੀ to do list ਦੇ ਕੰਮ ਪੂਰੇ ਹੋ ਜਾਣ l
ਇਹਦੇ ਲਈ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦਸਦਾ ਕਿ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣਾ ਟਾਈਮ ਮੈਨੇਜ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
ਜਿਵੇਂ ਮੰਨ ਲਓ ਕਿ ਮੇਰੀ to do list ਦੇ ਵਿੱਚ 10 ਕੰਮ ਨੇ,
ਉਹਨਾਂ 10 ਕੰਮਾ ਨੂੰ ਕਰਨ ਲਈ ਮੈਂ ਇੱਕ criteria ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਉਹ ਸਾਰੇ ਕੰਮ ਫਿੱਟ ਹੋ ਜਾਣ ਤੇ ਕੋਈ ਕੰਮ ਦੂਜੇ ਕੰਮ ਨੂੰ effect ਨਾ ਕਰੇ l
ਜਿਵੇਂ ਜਿਹੜੇ ਕੰਮ ਤਾਂ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਲੇਵਲ ਤੇ ਕਰਨੇ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਮੈਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿਸਮ ਦੀ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਵੇਰੇ ਜਲਦੀ ਉਠ ਕੇ ਖਤਮ ਕਰ ਲਾਓ l
ਫਿਰ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੂਜੇ ਸਾਰੇ ਕੰਮ ਆਪਣੇ ਆਪ ਮੈਨੇਜ ਹੋ ਜਾਣਗੇ l
ਕਿਓਂਕਿ ਕੁਝ ਕੰਮ ਦੂਜੇ ਵਿਅਕਤੀਆਂ ਤੇ depend ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ਕਿ ਉਸੇ ਦਿਨ ਪੂਰੇ ਨਾ ਹੋ ਸਕਣ ,
ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਫਿਰ to do list ਵਿੱਚ ਲਿਖੋ l

ਹਰ ਦਿਨ ਹਰ ਸਾਲ ਕੁਝ ਨਵਾਂ ਸਿਖੋ
ਸਾਨੂੰ ਚਾਹਿਦਾ ਹੈ ਕਿ ਅਸੀਂ ਹਰ ਸਾਲ ਅਤੇ ਹਰ ਦਿਨ ਕੁਝ ਨਵਾਂ ਸਿਖੀਏ, ਆਪਣੀਆਂ qualities ਨੂੰ ਵਧਾਈਏ,
ਮੈਂ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਬੋਲ ਬੋਲ ਕੇ ਆਪਣਾ ਬੋਲਣ ਦਾ skill ਵਧਿਆ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਦਾ ਹਾਂ l

ਮੈਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵਧੀਆ ਨਹੀਂ ਬੋਲ ਸਕਦਾ ਸੀ , ਹੁਣ ਵੀ ਵਧੀਆ ਨਹੀਂ ਬੋਲਦਾ ਪਰ ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ better ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ ਕਰਦਾ l ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਮੈਂ neglect ਕੀਤਾ , ਜਿਹੜੀਆਂ ਮੈਨੂੰ ਲਗਦਾ ਸੀ ਕਿ ਇਹ ਫਾਲਤੂ ਹਨ l

ਮੈਨੂੰ ਕੰਪਿਊਟਰ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਸੀ , 2009 ਦੇ ਵਿੱਚ ਜਦੋਂ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਸਾਡੇ ਘਰ ਕੰਪਿਊਟਰ ਆਇਆ ਤਾਂ ਮੈਂ ਸਾਰਾ ਦਿਨ orkut ਚਲਾਂਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਸੀ l ਇੱਕ ਸਾਲ ਪੂਰਾ ਰ੍ਝ੍ਹ ਕੇ orkut ਚਲਾਈ, ਫਿਰ ਬਾਅਦ ਚ ਖਤਮ l 2010 to till date ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ l ਮੈਂ ਕੰਪਿਊਟਰ ਤੇ ਡਿਜ਼ਾਇਨਿੰਗ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ , ਕਿਓਂਕਿ ਮੈਨੂੰ ਲਗਦਾ ਸੀ ਕਿ ਇਹ ਮੇਰੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦਾ ਇੱਕ ਹਿੱਸਾ ਹੈ l ਜੇ ਮੈਂ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਕਹਾਂਗਾ ਕਿ ਇਹ ਮੇਰੇ ਲਈ design ਕਰਦੇ ਤਾਂ ਉਹ ਕਹੇਗਾ ਕਿ ਅੱਜ ਨਹੀਂ ਮੈਂ ਕੱਲ ਕਰਾਂਗਾ, ਫਿਰ ਉਹ ਸ਼ਾਮ ਤੱਕ ਆ ਜਾਏਗਾ, ਫਿਰ ਮੈਂ ਦੇਖਾਂਗਾ, ਉਸ ਵਿੱਚ ਕੁਰੈਕਸ਼ਨ ਕਰਾਂਗਾ, ਉਹ ਉਹਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰੇਗਾ ਫਿਰ ਜਾ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਉਹ ਚੀਜ਼ ਮਿਲੇਗੀ. ਕਿੰਨਾ ਸਮਾਂ ਮੇਰਾ ਬਰਬਾਦ ਹੋਇਆ l ਬਚੋ ਇਸ ਚੀਜ਼ ਤੋਂ l
its better ਕਿ ਮੈਂ ਆਪ ਹੀ ਸਿਖ ਲਵਾਂ l at least ਉਹ ਸਾਰੇ skills ਜਿਹੜੇ ਮੇਰੀ ਜਰੂਰਤ ਹਨ, ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਤਾਂ ਮੈਂ ਸਿਖ ਸਕਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਨਹੀਂ l

ਬਾਰ ਬਾਰ ਇਸ ਗੱਲ ਤੇ ਕਦੋਂ ਤੱਕ ਰੋਂਦੇ ਰਹੋਗੇ ਕਿ ਮੈਨੂ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਜੀ, ਮੈਨੂੰ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ, ਮੈਂ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ ਜੀ,
ਉਹ ਬੇਵਕੂਫ਼ਾ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਤੇ ਸਿਖ ਲੈ l
ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ – ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਦੀ ਰੱਟ ਨਾਲ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ l

skill ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦਾ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ ;
ਤੁਸੀਂ ਕਿਸੇ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨੂੰ ਹੱਲ ਕਰਨਾ ਜਾਣਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਇੱਕ skill ਹੈ,
ਤੁਸੀਂ ਸੇਫ ਡਰਾਈਵਿੰਗ ਕਰਨਾ ਜਾਣਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਇੱਕ skill ਹੈ,
ਤੁਸੀਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਰਖ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਇੱਕ skill ਹੈ,
ਤੁਸੀਂ ਹਰ ਕੰਮ ਨੂੰ ਟਾਈਮ ਨਾਲ ਖਤਮ ਕਰਦੇ ਹੋ, ਇਹ ਇੱਕ skill ਹੈ,

skill ਕਿਸੇ ਵੀ ਕਿਸਮ ਦਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ l
ਹਰ ਸਾਲ ਹਰ ਰੋਝ ਨਵਾਂ ਸਿਖਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ;

EXPERIENCE ਤੋਂ ਬਚੋ
ਜਿੰਦਗੀ ਕਦੇ ਵੀ Experience ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਚਲਦੀ ;
Experience ਨੇ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਤਬਾਹ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ l
ਕੋਈ ਕਹਿੰਦਾ ਮੈਨੂੰ 40 ਸਾਲਾਂ ਦਾ ਤਜੁਰਬਾ ਹੈ,
ਕੋਈ ਕਹਿੰਦਾ ਮੈਨੂੰ 20 ਸਾਲਾਂ ਦਾ ਤਜੁਰਬਾ ਹੈ,

ਸਾਨੂੰ ਤਾਂ ਰੋਜ਼ ਸਿਖਣਾ ਚਾਹਿਦਾ ਹੈ l ਹਰ ਰੋਜ ਕੁਝ ਨਵਾਂ Experience ਕਰਨਾ ਚਾਹਿਦਾ ਹੈ l
ਤੁਸੀਂ ਕਹਿਨੇ ਹੋ ਕਿ ਮੈ ਅੱਜ ਤੋਂ 5 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਸੀ, ਮੈਨੂੰ ਬੜਾ experience ਹੈ,
ਓ ਭਾਈ ਸਾਹਿਬ, 5 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਵਾਲਾ experience 2019 ਚ ਕੰਮ ਨਹੀਓ ਆਉਣਾ l

ਤੁਸੀਂ 5 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਜੋ ਕਰਦੇ ਸੀ, ਉਸ ਦਾ ਅੱਜ ਦੀ ਤਾਰੀਖ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਫਾਇਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈ l
ਉਸ ਨੂੰ ਅਪਡੇਟ ਕਰੋ l
ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਵੱਡੀਆਂ ਵੱਡੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਬੰਦ ਹੋ ਗਈਆਂ, ਕਿਓਂ ਉਹ ਆਪਣਾ ਪੁਰਾਣਾ experience ਵਰਤ ਰਹੀਆਂ ਸੀ,
NOKIA ਵਰਗੀ ਕੰਪਨੀ ਬੰਦ ਹੋ ਗਈ, ਕਿੰਨਾ ਨਾਮ ਸੀ, ਪਰ ਅਪਡੇਟ ਨਾ ਕਰਨ ਕਰਕੇ, ਖਤਮ ਹੋ ਗਈ l

ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਇਹ ਸੋਚਦੇ ਹੋ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ experience ਤੁਹਾਨੂੰ ਤੁਹਾਡੀ ਜਿੰਦਗੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਲੈ ਜਾਏਗਾ
ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਗਲਤ ਸੋਚਦੇ ਹੋ l
ਤੁਹਾਡਾ experience ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਿਥੇ ਤੱਕ ਲੈ ਕੇ ਆ ਸਕਦਾ ਸੀ, ਲੈ ਆਇਆ ਹੈ l
ਅੱਗੇ ਦਾ ਰਸਤਾ ਤੁਹਾਡੇ skills, ਤੁਸੀਂ ਕਿੰਨਾ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ update ਕਰਦੇ ਹੋਏ, ਕਿੰਨੀ ਤੁਹਾਡੀ knowledge ਹੈ, ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਫਾਇਨਲ ਹੋਏਗਾ l

ਇੱਕ student ਪਹਿਲੀ ਕਲਾਸ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ 10 ਕਲਾਸ ਤੱਕ ਕਦੀ ਤੀਜੇ ਰੈੰਕ ਤੋਂ ਥੱਲੇ ਨਹੀਂ ਗਿਆ l ਕਦੀ ਉਹ first ਆਵੇ, ਕਦੀ second ਆਵੇ, ਕਦੀ third ਆਵੇ, ਫਿਰ ਅਚਾਨਕ ਇਹੋ ਜਿਹਾ ਕੀ ਹੋਇਆ ਕਿ +1 ਚ ਆਉਂਦਿਆਂ ਹੀ ਉਸ ਦੀ percentage ਥੱਲੇ ਡਿੱਗ ਗਈ l

Parent’s ਅਤੇ teachers’ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਇਹਨੂੰ ਬਾਹਰ ਦੀ ਹਵਾ ਲੱਗ ਗਈ ਹੈ l
ਇਹ ਉਮਰ ਹੀ ਇਹਦਾ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਬੱਚਾ ਸਾਡੀ ਗੱਲ ਹੀ ਨਹੀ ਸੁਣਦਾ,
ਹੁਣ ਤਾਂ tutiona ਵੀ ਚਾਰ ਚਾਰ ਪੜਦਾ ਹੈ, ਫਿਰ ਵੀ ਨੰਬਰ ਨਹੀਂ ਆਏ l

ਉਹ ਭਲਿਓ ਲੋਕੋ, ਬੱਚੇ ਦਾ ਕੋਈ ਕਸੂਰ ਨਹੀਂ ਹੈ ,
ਕਿਓਂਕਿ ਉਹ ਬੱਚਾ 11 ਵਿੱਚ ਵੀ ਉਹਦਾ ਹੀ ਪੜ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਜਿਦਾਂ ਦਾ ਉਹਨੂੰ ਪਿਛਲੇ 10 ਸਾਲਾਂ ਦਾ experience ਸੀ,
ਤੇ ਟੀਚਰ ਵੀ ਉਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਪੜਾ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਜਿਦਾ ਦਾ ਉਹਨੂੰ ਬਾਕੀਆਂ ਕਲਾਸਾਂ ਦਾ experience ਸੀ l
ਅਸੀਂ 11ਵੀ ਚ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਇਹ ਤਾਂ ਕਹਿ ਦਿੰਨੇ ਹਾਂ ਕਿ ਇਹ ਤੁਹਾਡਾ turning point ਹੈ l ਪਰ ਇਹ turn ਲੈਣਾ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੈ, ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਦਸਦਾ l
ਮਾਸਟਰ ਜੀ ਨੇ ਕਿਤਾਬ ਚੱਕੀ ਤੇ ਲੱਗ ਗਏ ਪੜਾਉਣ ਅਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਤਾਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ experience ਹੈ ਕਿਤਾਬ ਪੜ੍ਹਣ ਦਾ ,
ਉਥੇ ਹੀ ਬੇੜਾ ਗਰਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ l
ਡਰਾਈਵਿੰਗ ਸਿਖਦੀਆਂ ਜਿੰਨੀ ਦੇਰ ਤੱਕ ਮੋੜ ਲੈਣਾ ਨਹੀਂ ਸਿਖਾਂਗੇ ਤਾਂ ਗੱਡੀ ਮੋੜ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ l ਪਰ ਉਹਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਵਾਰੀ ਦੱਸਣਾ ਤਾਂ ਪਏਗਾ l

ਪੁਰਾਣਾ experience ਛਡੋਗੇ ਤੇ ਨਵੀਆਂ ਨਵੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਸਿਖੋ ਫਿਰ ਹੀ ਸਫਲ ਹੋ ਸਕੋਂਗੇ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਕੋਈ ਫਾਇਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈl
ਹਰ ਦਿਨ ਨਵਾਂ ਹੈ l
ਜਿੰਨੀ ਦੁਨੀਆਂ ਪਿਛਲੇ 20 ਸਾਲਾਂ ਚ ਬਦਲੀ ਹੈ ਇਹਨੀਂ ਤਾਂ 200 ਸਾਲਾਂ ਚ ਨਹੀਂ ਬਦਲੀ
ਇਹਨੀਂ technology ਆ ਗਈ, ਸਭ ਕੁਝ ਆ ਗਿਆ, ਫਿਰ ਵੀ ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਕਹੋਂ ਕ ਨਹੀਂ ਮੈਨੂੰ ਤਾਂ 50 ਸਾਲਾਂ ਦਾ experience ਹੈ, ਤਾਂ ਵੀ ਫਿਰ ਤਾਂ ਔਖਾ l

Change your mind set.

ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ
ਜਿੰਨੀ ਦੇਰ ਤੱਕ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀਂ ਕਰੋਗੇ ਉਹਨੀ ਦੇਰ ਤੱਕ ਕੋਈ ਵੀ success ਹਾਸਿਲ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕੋਗੇ l
ਮੈਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਵੱਡੇ ਵੱਡੇ talented ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਜਿੰਨਾ ਕੋਈ ਕਿਸੇ ਚੀਜ਼ ਦੀ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਸੀ, ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਬਰਬਾਦ ਹੁੰਦੇ ਵੇਖਿਆ ਹੈ, ਸਿਰਫ ਇੱਕ ਹੀ ਕਾਰਨ ਸੀ ਕਿ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ, ਆਪਨੇ ਆਪ ਨੂੰ ਅਪਡੇਟ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ l
ਜਿੰਦਗੀ ਇਹਨੀਂ ਫਾਸਟ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ, ਲੋਕ ਇਹਨੀ ਅੱਗੇ ਵਧ ਚੁੱਕੇ ਹਨ ਕਿ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਰੁੱਕ ਜਾਓਗੇ ਤੇ

ਮੇਰੇ ਤਾਂ ਮੋਬਾਇਲ ਤੇ 4 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਅਪਡੇਟ ਆ ਜਾਂਦੀ ਹੈ l ਪਿਛਲਾ ਹਲੇ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪਤਾ ਨੀ ਚਲਿਆ l

TIME ਦੀ ਕਦਰ ਕਰਨਾ ਸਿਖੋ l

ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਲੋਕ ਬਹੁਤ ਮਿਲਦੇ ਹੈ, ਜਿਹੜੇ ਇਹ ਕਹਿਣਗੇ ਕਿ ਯਾਰ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਟਾਈਮ ਨਹੀਂ ਹੈ,
ਕਾਸ਼ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਥੋੜਾ ਹੋਰ ਟਾਈਮ ਹੁੰਦਾ,

ਚਲੋ, ਕਿਸੇ ਨੂੰ 30 ਘੰਟੇ ਦੇ ਦਿੰਨੇ ਆ ,
ਫਿਰ ਉਹ ਕੀ ਉਖਾੜ ਲਏਗਾ,
ਕੁਛ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕਰ ਸਕਦਾ l

ਜਿੰਨੇ 24 ਘੰਟਿਆ ਚ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ,
ਉਹ 30 ਘੰਟਿਆ ਵਿੱਚ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕਰ ਲਏਗਾ ,

ਟਾਈਮ ਨਹੀਂ ਹੈ,
ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੀ ਚੁਗਲੀ ਕਰਨ ਦਾ ਟਾਈਮ ਹੈਗਾ,
ਪਿਚਰ ਦੇਖਣ ਜਾਣ ਦਾ ਟਾਈਮ ਹੈਗਾ,
ਸਾਰੇ ਉਹ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦਾ ਟਾਈਮ ਹੈਗਾ ਜਿਸ ਦਾ ਕੋਈ ਮਕਸਦ ਨਹੀਂ, ਕੋਈ ਫਾਇਦਾ ਨਹੀਂ,
ਪਰ
ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ ਕੰਮ ਕਰਨ ਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀਂ ਹੈਗਾ l

ਸੋ ਰਿਹਾ ਸਾੰਡ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਵੇਰੇ 10 ਵਜੇ ਤੱਕ ,
ਘਰਦੇ ਵੀ ਕਈ ਵਾਰ ਸ਼ਕ ਕਰਦੇ ਹੈ, ਕਿ ਸੁੱਤਾ ਹੀ ਹੈ ਕਿ ਬੱਸ ਚੱਲਾ ਗਿਆ l
ਇਹ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਰਾਤ 2 ਵਜੇ ਤਾਂ ਘਰ ਆਇਆ ਹੈ ,
10 ਵਜੇ ਦਾ ਸੁੱਤਾ ਗਿਆ , 12 ਘੰਟੇ ਚਾਹੀਦੇ ਨੇ ਨੀਂਦ ਪੂਰੀ ਕਰਨ ਲਈ ;

ਬਾਬਿਓ ਨਾ ਕਰੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ,

ਜਿੰਦਗੀ ਚ ਇੱਕ ਚੀਜ਼ ਹਮੇਸ਼ਾ ਦਿਮਾਗ ਚ ਰਖਨੀ ਹੈ,
ਸੂਰਜ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨਾ ਉਠਾਵੋ,
ਤੁਸੀਂ ਸੂਰਜ ਨੂੰ ਉਠਾਓ l
ਫਿਰ ਦੇਖੋ ਜਿੰਦਗੀ ਦਾ ਮਜ਼ਾ , ਮੈਂ ਕਿਹਾ ਕਮਾਲ ਹੀ ਹੋ ਜਾਏਗੀ l

ਅਬਦੁਲ ਕਲਾਮ ਕੋਲ ਵੀ ਤਾਂ 24 ਘੰਟੇ ਹੀ ਸੀ,
ਸਚਿਨ ਤੇਂਦੁਲਕਰ ਕੋਲ ਵੀ 24 ਘੰਟੇ ਹੀ ਸੀ,
ਲਤਾ ਮੰਗੇਸ਼ਕਰ ਕੋਲ ਵੀ 24 ਘੰਟੇ ਹੀ ਸੀ,
ਅੰਬਾਨੀ ਕੋਲ ਵੀ 24 ਘੰਟੇ ਹੀ ਸੀ,
ਟਾਟਾ ਕੋਲ ਵੀ 24 ਘੰਟੇ ਹੀ ਸੀ,

ਦੇਖੋ ਜੀ, 2 ਚੀਜ਼ਾਂ ਹੋਣੀਆਂ ਨੇ,
ਆਪੇ ਬਦਲ ਗਏ ਤਾਂ ਠੀਕ,
ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਜੇ ਕੀਤੇ ਟਾਈਮ ਨੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਦਲ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬੜੀ ਮੁਸ਼ਕਲ ਆਉਣੀ ਹੈ l

ਜਿੰਦਗੀ ਦੀ ਕਦਰ ਕਰਨਾ ਸਿਖੋ
ਬਹੁੱਤ ਮੁਸ਼ਕਲ ਹੈ, ਜਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਕਾਬੂ ਕਰਨਾ l
ਮੈਂ ਅਕਸਰ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਬੜੀ ਸ਼ੋਰਟ ਜਿਹੀ ਜਿੰਦਗੀ ਹੈ,
ਪਤਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਲੱਗਣਾ ਕਦੋਂ ਹਥੋਂ ਨਿਕਲ ਗਈ l

ਇਸ ਜਿੰਦਗੀ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਚਲਾਉਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ ਕਰੋ l
ਕਦੀ ਕਦੀ ਮੈਂ ਸੋਚਦਾ ਕਿ ਮੰਨ ਲਓ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਉਹ ਡੋਰੇਮੋਨ ਵਾਲਾ ਗੁੱਡਾ ਹੈ,
ਜਾਂ ਫਿਰ ਉਹ ਸ਼ਾਕਾਲਾਲਾ ਬੂਮ ਬੂਮ ਵਾਲੀ ਪੈਂਸਿਲ ਹੋਵੇ,
ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ ਮਿਲੇ ਕਿ ਜੋ ਗੱਡੀ ਖਰੀਦ ਸਕਦਾ ਖਰੀਦ ਲੈ,
ਜਿਦਾਂ ਦੀ ਮਰਜੀ, ਪੂਰਾ ਕੰਫਰਟ, ਫਰਸਟ ਕਲਾਸ ‘
ਪਰ ਸ਼ਰਤ ਇੱਕ ਹੀ ਹੈ, ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੂਜੀ ਗੱਡੀ ਨਹੀਂ ਮਿਲਣੀ

ਮੇਰਾ ਸਵਾਲ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਗੱਡੀ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਰਖੋਗੇ ;
ਬੜੇ ਧਿਆਨ ਨਾਲ ਰਖੋਗੇ ਨਾ,
ਕਿਓਂਕਿ ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੀ ਤਾਂ ਮਿਲੀ ਹੈ,

ਫਿਰ ਇਹ ਸ਼ਰੀਰ ਵੀ ਤਾਂ ਇੱਕ ਵਾਰੀ ਮਿਲਿਆ ;

ਹੋਰ ਇੱਕ ਧਿਆਨ ਪਤਾ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਰਖੋਗੇ,
ਕਿ ਕੀਤੇ ਇਹ ਗੱਡੀ ਗਲਤ ਹਥਾਂ ਵਿੱਚ ਨਾ ਚਲੀ ਜਾਵੇ

ਕਿਓਂਕਿ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੀ ਗੱਡੀ ਨੂੰ ਚਲਾਓਗੇ ਤੇ ਕੋਈ ਹੋਰ ਕਿਦਾਂ ਚਲਾਏਗਾ,
ਇਸ ਗੱਲ ਦਾ ਜਮੀਨ ਅਸਮਾਨ ਦਾ ਫਰਕ ਹੈ ਜੀ l
ਜੋ ਖਿਯਾਲ ਤੁਸੀਂ ਰਖ ਲੇਣਾ
ਉਹ ਦੂਸਰਾ ਹੋਰ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਰਖ ਸਕਦਾ l

ਜੈਸੀ ਸੰਗਤ ਵੈਸੀ ਰੰਗਤ
ਤੁਸੀਂ ਕੋਣ ਹੋ? ਇਹ ਚੀਜ਼ define ਕਿਦਾਂ ਹੋਏਗੀ ਜਦੋਂ ਇਹ ਪਤਾ ਹੋਏਗਾ ਕਿ ਤੁਹਾਡੀ ਸੰਗਤ ਕਿਹੋ ਜਿਹੀ ਹੈ,
ਤੁਸੀਂ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿੰਦੇ ਹੋ , ਇਹ decide ਕਰੇਗਾ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਹੋ.
ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਸਾਰੇ ਅੰਦਾਜ਼ਾ ਹੀ ਲਾਉਂਦੇ ਰਹਿ ਜਾਣਗੇ ਇਹ ਤਾਂ ਇਹਦਾ ਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਉਹਦਾ ਦਾ ਹੈ, etc etc

ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਚੀਜ਼ ਹੈ ਤੁਸੀਂ ਕਿੰਨਾ ਲੋਕਾਂ ਨਾਲ ਰਹਿ ਰਹੇ ਹੋ l
ਰੋਟੀ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਜਹਿਰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖਵਾ ਦਵੇ ਤਾਂ ਉਹਦਾ ਇਲਾਜ਼ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ l
ਪਰ ਜੇ ਕੋਈ ਕਿਸੇ ਦੇ ਕੰਨ ਚ ਕੋਈ ਗਲਤ ਗੱਲ ਕਰ ਗਿਆ ਤਾਂ ਮਹਾਰਾਜ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਨਹੀਂ ਹੈ ;

ਇਸ ਕਰਕੇ ਆਪਣੇ ਆਲੇ ਦੁਆਲੇ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਰਖੋ,
ਜੇ ਨਹੀਂ ਲਭਦੇ ਤਾਂ better ਹੈ ਕਿ ਇਕੱਲੇ ਹੀ ਰਹੋ l

ਇਹ ਤਾਂ ਇੱਕ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਕੁਆਲਿਟੀ ਹੈ ਜਿਹੜੀ ਇਹ decide ਕਰੇਗੀ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ future ਕੀ ਹੈ l

ਹੁਣ ਰਾਮਾਯਣ ਸੁਣੀ ਹੈ ਸਾਰਿਆਂ ਨੇ , ਪਤਾ ਹੈ ਥੋੜਾ ਬਹੁਤ ;
ਕਿ ਹੋਇਆ ਸੀ, ਕੀ ਮੰਥਰਾ ਨੇ ਕੈਕਈ ਨੂੰ ਕੰਨ ਚ ਫੂਕ ਹੀ ਮਾਰੀ ਸੀ,
ਕਿ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਚੰਦਰ ਦਾ ਤਾਂ ਸਵੇਰੇ ਰਾਜ ਤਿਲਕ ਹੋ ਜਾਣਾ ਤੇਰਾ ਮੁੰਡਾ ਭਰਤ ਓਦਾ ਦਾ ਓਦਾ ਹੀ ਰਹਿ ਜਾਣਾ;
ਹਾਲੇ ਵੀ ਟਾਈਮ ਹੀ, ਰਾਜਾ ਦਸ਼ਰਥ ਤਾਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਤੇਰੇ ਵਸ ਚ ਹੈ,
ਭੇਜਦੇ ਰਾਮ ਨੂੰ 14 ਸਾਲ ਦੇ ਵਨਵਾਸ ਤੇ, ਤੇ ਆਪਣੇ ਮੁੰਡੇ ਭਰਤ ਨੂੰ ਰਾਜ ਗੱਦੀ ਤੇ ਬਿਠਾ l

ਦੇਖੋ ਇੱਕ ਚੁਗਲੀ ਦਾ ਕੀ ਨਤੀਜਾ ਨਿਕਲਿਆ ਕਿ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਚੰਦਰ ਜੀ ਸੋਚ ਰਹੇ ਹੋਣੇ ਕਿ ਸਵੇਰੇ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਰਾਜ ਤਿਲਕ ਹੋਣਾ ਪਰ ਅਸਲੀਅਤ ਕੁਝ ਹੋ ਹੀ ਸੀ l
ਇਥੇ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਚੰਦਰ ਦਾ ਕੋਈ ਕਸੂਰ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ਸੀ ਨਾ l
ਉਤੋਂ ਜਦੋਂ ਵਨਵਾਸ ਲਈ ਨਿਕਲੇ ਤਾਂ ਭਰਤ ਨੇ ਚੱਪਲ ਅਲੱਗ ਤੋਂ ਲਵਾ ਲਈ ਕਹਿੰਦੇ ਕਿ ਰਾਜ ਗੱਦੀ ਤੇ ਰਖੂੰਗਾ l
ਜਾਣਾ ਵੀ ਨੰਗੇ ਪੈਰੀ ਪਿਆ l

ਇਹ ਸਭ ਕਿਓਂ ਹੋਇਆ, ਸਿਰਫ ਮਾੜੀ ਸੰਗਤ ਕਾਰਨ l
ਇਸ ਲਈ ਮਾੜਾ ਸਾਥ ਛੱਡੋ ਤੇ ਵਧੀਆ ਸੰਗਤ ਅਪਣਾਓ l
ਫਿਰ ਦੇਖੋ ਦੁਨੀਆ ਕਿਥੇ ਦੀ ਕਿਥੇ ਲੈ ਕੇ ਜਾਂਦੀ l

ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਗੱਲ ਇਹ ਕਿ ਪਤਾ ਕਿਦਾਂ ਲੱਗੇ ਕਿ ਕਿਹੜੀ ਸੰਗਤ ਵਧੀਆ ਤੇ ਕਿਹੜੀ ਮਾੜੀ ?
ਜਿਹਨਾਂ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਰਹਿ ਕੇ ਤੁਹਾਡੇ ਮਨ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਵੱਡੇ ਖਿਆਲ ਉਠਣ, ਰਾਤਾਂ ਦੀ ਨੀਂਦ ਉੜ ਜਾਵੇ , ਸਾਰਾ ਦਿਨ ਬੱਸ ਇਹੀ ਸੋਚ ਵਿਚਾਰ ਚ ਨਿਕਲ ਜਾਵੇ ਕਿ ਅੱਗੇ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਧਣਾ ਹੈ l ਉਹ ਹੀ ਸੰਗਤ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੈ l
ਜਿਥੇ comfort zone ਆ ਗਿਆ, ਉਥੇ ਹੀ ਬੇੜਾ ਗਰਕਨਾ ਸ਼ੁਰੂ l

ਇੱਕ ਗੱਲ ਆਪਣੇ ਪੱਲੇ ਬਣ ਲਓ ਕਿ ਕਦੇ ਵੀ ਆਪਣੀ ਜਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ ਸਫਲ ਆਦਮੀ ਦੀ ਬੁਰਾਈ ਨਾ ਕਰਿਓ
ਤੁਸੀਂ ਫੇਲ ਹੋ ਜਾਓਗੇ l ਕਿਓਂਕਿ ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਸਫਲ ਆਦਮੀ ਦੀ ਬੁਰਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ , ਉਸ ਦੀ ਸਫਲਤਾ ਦੀ ਬੁਰਾਈ ਕਰ ਰਹੇ ਹੋ, ਤੇ ਸਫਲਤਾ ਇਹ ਸਭ ਦੇਖ ਰਹੀ ਹੈ, ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਕਦੀ ਨਹੀਂ ਆਏਗੀ, ਕਿਓਂਕਿ ਉਹਨੂੰ ਪਤਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਦੀ ਕਦਰ ਨਹੀਂ ਹੈ l