क्या इंसानियत मर चुकी है?- हिमांशु अरोड़ा

  • Human being is a very beautiful creature. जिसने अपने दिमाग और मेहनत से आकाश में उड़ना सीख लिया है और समुंद्र की गहराईयों में उतर चुका है l जहाँ जानवर के पास नुकीले सिंघो के बावजूद भी वो अपना बचाव करने में असफल हो जाते है वहां इंसान ने सिंघों के बिना ही सिर्फ अपनी बुद्धि के इस्तेमाल से खुद का बचाव करना सीख लिया है l पापी हो या कोई सज्जन पुरुष, नास्तिक हो या आस्तिक, educated हो या अनपढ़, मुर्ख हो या चालाक, दिहाड़ीदार हो या मंत्री, peon हो या officer, गोरा हो या काला, सब इंसान है l एक छोटी सी example से समझते है कि ये सारी दुनिया एक box यानि एक डिब्बे के समान है और हम यानि इंसान उस डिब्बे में पड़ी गेंदों के समान – वो गेंदे बड़ी भी है, छोटी भी, सफेद भी है और काली भी l उस डिब्बे को अगर कोई हिलाता है या उसके साथ कुछ भी करता है तो उसके अंदर पड़ी सभी गेंदे affect होंगी फिर चाहे वो गेंद कोई भी हो, कैसी भी हो l आज इंसान – इंसान से ही दूर भाग रहा है , हम शायद भूल चुके है कि religion और caste से पहले हम इंसान है- human being है l सभी की feelings और problems काफी हद तक एक ही है l आज भगवान को मानने वाला , भगवान को ना मानने वाले को इंसान नहीं समझता है ,मंत्री अफसर को इंसान नहीं समझता, अफसर चपरासी को इंसान नहीं समझता , अमीर गरीब को इंसान नहीं समझता l क्या हम भूल चुके है कि दुसरे व्यक्ति के पास भी वैसा ही दिल है जैसा हमारे पास है l उसका भी परिवार है, उसे भी भूख प्यास वैसी ही लगती है जैसी हमें लगती है, उसे भी आराम की जरूरत है l उसे भी अपने बच्चे अच्छे लगते है , उसे भी अपने लिए और अपने परिवार के लिए कुछ करना है l
  • लेकिन हम दूसरों की खुशिओं को कुचलकर comfort हासिल करना चाहते है l एक धुप में जाकर मजदूरी करता है और दूसरा दफ्तर में बैठकर pen चलाता है लेकिन target और goal तो एक ही है – “समाज के लिए काम करना” किसी को नीच कहना या गलत behave करना मानवता का अपमान है l क्या छोटे अपराधियों को झेल भेजना ठीक है ? उन्हें किसी सुधारशाला में भी भेजा जा सकता है जहाँ उसको जिंदगी का सही मतलब समझाया जाये और उसकी जिंदगी बदली जा सके l इससे समाझ में सुधार आ सकता है l कोई इंसान दुसरे इंसान कि मजबूरी का फायदा उठाकर उसके साथ जानवरों जैसा behave करे और उसे इंसान ही ना समझे l यह ठीक नहीं है l रिक्शा चलाकर एक इंसान दुसरे इंसान को घोड़ा बनकर खींचता है और मंजिल तक पहुंचाता है और वही इंसान थोड़े से पैसो के लिए उसके साथ झगड़ा करे और उसे गाली दे  – इंसानियत मर चुकी है l एक सफाई कर्मचारी रोज़ घर से आपका कचरा उठा कर लेकर जाता है ऐसे में उसे नीच कहना और insult  करना यह मानवता कि हत्या ही तो है l क्यों दुसरे को उसके काम से देखा जा रहा है हम यह क्यूँ नहीं देख पाते कि वो भी इंसान है , उसके भी बच्चे है, उसका भी परिवार है l एक समय में जितनी भूख एक गरीब को लगती है उतनी ही अमीर को लगती है l खाना खाने की capacity में ज्यादा अंतर तो नहीं है न l basic needs तो सब की एक जैसी है l एक मंद बुद्धि जिसके पास दुनिया कि हर सुख सुविधा है क्यूंकि उसके पास पैसा और अप्रोच है और वो एक मेहनती और इमानदार इंसान के उपर बैठ कर उसका शोषण करता रहे और हम यह कहते रहे कि सिस्टम ही ऐसा है l एक ओर ऊँची- ऊँची बिल्डिंग में , महलों जैसे घरों में तरह तरह के पकवान पकते हो और दूसरी ओर फुटपाथ पर सोने वालों को पेट भरने के लिए रोटी भी न मिले l यह चिंता का विषय है l जब पैसे की कमी के कारण किसी माँ कि गोद सुनी हो जाती है वहां इंसानियत का गला घोंट दिया जाता है l जहाँ पेट की आग मिटाने के लिए एक lady केवल मान ही नहीं विवश होकर अपना देह भी बेच देती है, वहां इंसानियत सिसक सिसक कर रोती है l अमीर का पुत्र होने पर पैसे को फूंकने का अधिकार और गरीब का पुत्र होने पर भूखे रहने की मजबूरी – दोनों ही स्थितियां भयंकर है l इंसानियत हमें समानता सिखाती है – equality होनी बहुत जरूरी है l system ऐसा होना चाहिए कि सब को उपर उठने के लिए एक जैसी opportunities मिले l अमीर को गरीब की मदद करनी चाहिए न कि उसका शोषण l शरीर भी अपने अंदर से जरूरत से अधिक खाया गया भोजन निकाल देता है तो हम इतना पैसा लेकर कहाँ जाने की सोच रहे है l हर एक को दुसरे के लिए कुछ न कुछ जरुर करना चाहिए ताकि जो नर्क की ज़िन्दगी जी रहा है उसे भी जिन्दगी का आनन्द मिल सके l system कैसा होना चाहिए – एक example से समझते है l एक वृक्ष के हर एक पत्ते और शाखा को सूरज की रोशनी और हवा चाहिए और इसी वजह से वृक्ष की फैलावट ऐसी होती है हर एक पत्ते को रोशनी और हवा मिलती है l वृक्ष अपने अभी अंगों का एक जैसा ख्याल रखता है और यही कारण है कि वृक्ष के सभी अंग वृक्ष को एक बड़ा और विशाल बनाने में पूरा योगदान देते है l इसीलिए हमें भी कुछ ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो सब को समान अवसर प्रदान करे ताकि सभी देश की विकास यात्रा में शामिल हो सके l चंद लोगो को विकास यात्रा में शामिल करना क्यूंकि उनके पास पैसा है देश को आगे नहीं पीछे लेकर जा रहा है l व्यक्ति का विकास समाज के लिए और समाज का विकास व्यक्ति के लिए होना चाहिए l अगर हम यह प्रयास करें कि हमारे आस पास कोई भी व्यक्ति दुखी न हो, भूखा न सोये, उसके पास अपने परिवार को पालने के लिए पर्याप्त धन हो तो शायद समाज का चेहरा बदल सकता है और हम सब खुद को विकसति कर सकते है l आज जरूरत है हर एक इन्सान को उसकी capability के अनुसार शिक्षा मिले, काम मिले, आगे बड़ने  के लिए समान अवसर मिले l तब धरती पर ही स्वर्ग बन जायेगा l -हिमांशु अरोड़ा

सहयोग करें, शिकायत नहीं । Himanshu Arora |

श्री कृष्ण ने जब गोवर्धन पर्वत अपनी ऊंगली पर उठाया था, वो वाक्य हम सब को अच्छी तरह मालूम है l
इंद्र देव के गुस्से ने जब बदले की भावना का रूप धारण किया तो निरंतर बारिश शुरू कर दी, जिससे ब्रज वासी काफी परेशानी में आ गये l हर जगह तबाही का माहोल था, लोग डूब रहे थे, जानवर मर रहे थे l इस संकट को देखते हुए श्री कृष्ण ने ब्रज वासिओं की मदद करने के लिए वहां स्थित गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठा कर ब्रजवासिओं को आश्रय दिया l हालांकि ब्रजवासी जानते थे कि हम उस पर्वत को उठा नहीं सकते फिर भी सिर्फ सहयोग हेतु हर ब्रजवासी एक एक लाठी उस पर्वत पर लगाता है ताकि श्री कृष्ण को यह ना लगे कि वो अकेले है l
आज की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है,
सरकारें, प्रशासन, डाक्टर, सफाई कर्मचारी, बैंकर, जरूरी समान की सप्लाई करने वाले हम सभी को बचाए रखने के लिए इस संकट की घड़ी में हर सफल प्रयास कर रहें है और अगर हम सहयोग नहीं देंगे, घरों में नहीं रहेंगे, social distancing का खयाल नहीं रखेंगे, बार बार हाथ नहीं धोयेंगे, मास्क नहीं पहनेंगे तो इनका मनोबल टूट सकता है l इसलिए सहयोग करें, शिकायत बिलकुल न करें l घर बैठ कर बातें बनाना और सोशल मिडिया पर प्रसिधि के लिए सिस्टम को बुरा कहना बहुत आसान है l सिस्टम आपकी भलाई चाहता है और वो तभी संभव है जब आप शिकायत नहीं सहयोग करेंगे l
घर पर रहें – सुरक्षित रहें l

– Himanshu Arora

क्या बच्चों और औरतों के हमने राक्षसों के साथ रहने को मजबूर कर दिया है ?- HIMANSHU ARORA

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कोरोना वाइरस की वजह से आज देश में LOCKDOWN के 22 दिन पुरे हो चुके है l

दोस्तों, जहां सरकार इस महामारी से बचने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, वहीं सरकार ने लोगो से अपील की है कि वो घरों से बाहर ना निकलें l घर पर ही रहें ताकि वो सुरक्षित रह सकें l

ऐसे में लोगों ने काफी एकजुटता दिखाई है, और घरों से बाहर ना निकल कर एक बहुत अच्छा संदेश दिया है जो बहुत ही सराहनीय है l

इसके उल्ट कुछ shocking नतीजे भी निकल कर आ रहे है, The Hindu अखबार के माध्यम से छपी एक खबर जिसमें यह कहा गया है कि इस lockdown के 10 दिनों के दौरान child abuse and domestic violence सबंधी 92,000 से ज्यादा calls recieve की गईं है l ऐसी खबर बहुत ही दिल देह्लानी वाली है l

क्या बच्चों और औरतों के हमने राक्षसों के साथ रहने को मजबूर कर दिया है ?

मतलब , ऐसे लोग कर क्या रहे है? कैसे माहोल से हम निकल रहे है और कैसी हरकतें ये लोग कर रहे है l लोगो ने इंसानियत और दया तो अपने अंदर से खत्म ही कर दी है l

कल एक विडिओ देख रहा था, उसमें एक औरत एक छोटी सी बच्ची को जो मेरे हिसाब से 4 साल से कम उम्र की होगी, उसको इतनी बेरहमी से मार रही थी कि उस बच्ची ने शायद पहली बार “बचाओ” शब्द का इस्तेमाल किया होगा l वो वीडियो देखने लायक नहीं था l और तो और वीडियो बनाने वाले ने भी कुछ नहीं किया l

दोस्तों, आप सब से हाथ झोड़ कर विनती है कि ये जो परिवार है, यह बना बनाया नहीं मिलता, इसे बनाना पड़ता है और बनाते भी हम खुद ही है, फिर उन्ही परिवार के सदस्यों से इतनी कुरुर्ता क्यूँ की जाती है l छोटे बच्चे गलतीयां करते है, आप ने भी की होंगी, मैंने भी की होंगी लेकिन उनको इस तरह मारना सही बात नहीं है l

महिलाएं सारा दिन घर का काम करती है,बच्चों की देख रेख करती है, कुछ जो नौकरी पेशा महिलाएं है वो balance बना के नौकरी और परिवार चलाती है तो ऐसे में उनको मारना या उनको निंदा करना बिलकुल गलत और असहनीय है l

ये जो आंकड़े सामने आये है यह बहुत ही दिल दहलाने वाले आंकड़े है l

मैं यह भी मानता हूँ कि इनमे कुछ बच्चे और औरतें ऐसी भी होंगी जिन्होंने डर की वजह से inform नहीं किया होगा ताकि कोई सख्त करवाई न हो और बाद में उन्हें दोषी ना ठहराया जाये l  

आप सभी से अनुरोध है कि ऐसी कोई बात अगर आप के आस पास देखने या सुनने को मिले तो कृपया आगे आये और इसे रोके l ऐसे बच्चे और महिलाएं जो इनके शिकार है उन्हें आप की जरूरत है l

जिम्मेवार बने lघर पर रहें, सुरक्षित रहें l  जय हिन्द l

इस QUARANTINE और LOCKDOWN के दौरान SELF CARE की तरफ ध्यान दें l HIMANSHU ARORA – COVID-19

QUARANTINE और LOCKDOWN आप को सबसे अलग बना सकते है l

हम अक्सर कहते थे कि हम बहुत busy हो चुके है, कुछ time अगर मिल जाता तो सब बढिया मैनेज कर लेते l तो भगवान ने आप की सुन ली है l अब आप खुद को समय भी दे सकते है और अपनी मर्ज़ी भी कर सकते है l

लेकिन ज्यादातर लोग या तो अपना time मोबाइल पर या फिर movies देख कर खराब कर रहे है l

ये जो lockdown का period है ये आप के golden period साबित हो सकता है l

यह समय आप की जिंदगी, career और future को बहुत बढिया बना सकता है l

इसमें दो राय नहीं है कि इस LOCKDOWN ने हमारे बहुत से कामों को रोक दिया है और हमारे routine की धज्जियां उड़ा दी है l

लेकिन दोस्तों इस दौरान भी जिंदगी को बदला जा सकता है l इस दौरान एक बहुत ही जरूरी काम जो आप बरसों से नहीं कर पा रहे है, वो कर सकते है और वो है – self care

इससे अच्छा मौका आपको अपनी पूरी जिंदगी में नहीं मिल सकता l

मैं मानता हूँ कि routines अच्छे होते है , हम हर वो काम कर सकते है जो हमें हमारी मंजिल तक ले जाये l

लेकिन इस समय आप अपने घरों में रह कर वो काम करिये वो आप अपनी daily routines की वजह से नहीं कर पाते थे l

  • आप अपने पूराने दोस्तों को फोन कर सकते है ;
  • आप मैडिटेशन कर सकते है ;
  • आप सुबह जल्दी उठने की आदत बना सकते है ;
  • आप अपना डाईट चार्ट तैयार कर सकते है;
  • आप अच्छी किताबें पड़ सकते है ;
  • आप उन सभी साइड projects के बारे में प्लैन कर सकते है जो आप हमेशा से अपनी routine life से हट कर करना चाहते थे;

क्यूंकि यही सही समय है l इसी period के दौरान आप अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए हर अच्छी आदत को अपना सकते हो l

Go for it… Stay Home – Stay Safe.

Jai Hind.

  • Himanshu Arora

नावेल कोरोना वाइरस के चलते एक अपील – COVID-19

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नावेल कोरोना वाइरस, जो कि पूरे विश्व में काफी तेज़ी से अपने पैर पसार रहा है, ऐसे में काफी जरूरत है कि हम सरकार द्वारा दिए जा रहे निर्देशों को ध्यान से समझें और पूरे सहयोग के साथ इस महामारी से बच सकने का हर सफल प्रयास करें l

आप को यह जानना जरूरी है कि आज पूरे विश्व में lock down या कर्फ्यू जैसे हालत क्यों है ? समस्याए पहले भी आती रही है जैसे डेंगू , मलेरिया या चिकनगुनिया  जिनका कोई इलाज नहीं था, लेकिन क्यूंकि ये मच्छरों से फैलता था तो हमने मच्छरों को मारना शुरू कर दिया, जिससे हालातों को सुधारा जा सका l

लेकिन अब ये नावेल कोरोना वाइरस , जो कि इंसानों से फ़ैल रहा है, इसके लिए पहले जैसे प्रयासों को संभव नहीं माना जा सकता है l ऐसे में जरूरत है तो सिर्फ कुछ सावधानीया बरतने की l व्यक्तिगत तौर पर इसे किसी भी तरह का चिंता का विषय बनाने की जरूरत नहीं है l आप सबसे आसान काम यह कर सकते है कि आप दूसरों से एक निर्धारित दुरी बनाये रखें l

ऐसे हालातों में दलेरी दिखाना कि आपको कुछ नहीं हो सकता, या आप बड़े महान है कि आप हर आपदा का सामना कर सकते है, आपके खतरे में डाल सकता है l आपको सावधानी बरतनी होगी l हो सकता है कि आप अपने दांतों या बालों से एक भारी ट्रक को खीँच सकते है लेकिन एक ना दिखने वाला वाइरस आपकी जान ले सकता है और आप कि वजह से बहुत सी जाने जा सकती है l

इन हालातों में जरूरी है कि जितना आप घर से कम बाहर निकलेंगे, उतना ही अच्छा है l ये समय घर पर बैठने का है l

अगर कोई चीज़ सामने से आ रही है, उससे अंदाजा लग सकता है कि वो हमें कितना नुक्सान पहुंचाएगी लेकिन इस वाइरस को तो देखा ही नहीं जा सकता है तो अंदाज़ा लगाना भी बहुत मुश्किल है l इसीलिए यह ज्यादा खतरनाक है l

लगातार काम करते रहने की क्षमता रखने वाले इंसान को आज कुदरत ने कुछ आराम करने के लिए समय दिया है जिसका फायदा हम सिर्फ घर पर बैठ कर उठा सकते है l

इस वायरस ने महामारी का रूप इसीलिए लिया है क्यूंकि इसने इन्सान को अपनी सवारी बना लिया है और जैसे जैसे इंसान घर से निकलता है ये वायरस ट्रेवल करता है और बाकी लोगों को भी infect करता है l

इसीलिए यह समय सावधानी बरतने का है ना की होशियारी या चालाकी दिखने का l

सरकारें अपना काम कर रहीं है, हर संभव कोशिश से इस समस्सया से निपटने का हल डूंडा जा रहा है l 

देखिये जरूरी है कि सरकार को कोशिश करने दे, लेकिन देखने में आया है कि सरकार का ज्यादातर समय आम पब्लिक को घरों में बिठाने में बर्बाद हो रहा हैं, जब कि आप खुद भी अपनी समझदारी से बैठ सकते है l ऐसा मत कीजिये, जिम्मेवार बनिये , बाहर के कामों को अगर बहुत जरूरी नहीं है तो टाल दिया जाये l

तो जरूरी है कि सरकार के निर्देशों की पालना की जाये , घरों से बाहर ना निकला जाये , अपनी immunity को बड़ाया जाये, हाथों को बार बार धोया जाये या सैनीटाईज़ किया जाये, एक दुसरे से निर्धारित दूरी पर रहा जाये और जो लोग आपकी सेफ्टी के लिए घर से बाहर काम कर रहे है, उनका हौंसला बडाया जाये l

घर पर रहें – सुरक्षित रहें l

  • हिमांशु अरोड़ा l